आज हम खाने की एक ऐसी चीज के बारे में बात करने वाले हैं जो कि हम सभी काफी टाइम से एक सुपर फूड के नाम पर खाते चले आ रहे हैं। साबूदाना। लेकिन क्या यह वाकई में सुपर फूड है? क्या यह वाकई में इतना हेल्दी है? जितना हेल्दी हम इसको समझते हैं? जितना हेल्दी समझ के हमारे पेरेंट्स ने हमें खिलाया है इसे?
बनाया कैसे जाता है?
सबसे पहले हम समझते हैं कि यह बनाया कैसे जाता है। आपको क्या लगा था कि क्या यह किसी पेड़ पर उगता है या फिर किसी पेड़ का सीड है? नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह एक प्लांट है जिसका नाम है कसावा। उसकी जड़ों से बनाया जाता है। पहले इसकी जड़ों को काटा जाता है। उसको अच्छे से धोया जाता है। छीला जाता है। उसको पीसा जाता है। पीसने के बाद उसे छाना जाता है। छानने के बाद जो नीचे उसका स्टार्च रह जाता है उसको निकाल के सुखा के पाउडर बना के फिर उसकी छोटी-छोटी बॉल्स बनाई जाती हैं। जिसको हम साबूदाना के रूप में कंज्यूम करते हैं। तो अब हमें यह तो पता चल गया कि यह एक हाईली प्रोसेस्ड फूड है जो कि नेचर ने हमें ऐसे ही नहीं दिया है बल्कि फैक्ट्री में बड़ी-बड़ी मशीनों के थ्रू बनाया जाता है।
फायदे
अब हम यह समझते हैं कि इसके फायदे क्या-क्या हैं? क्या आप जानते हैं कि साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 80 से 90 के बीच का होता है जो कि वाइट, ब्रेड और चीनी से भी ज्यादा है। अगर हम इसको खाएंगे तो हमारे ब्लड शुगर लेवल्स बहुत ही हाई हो सकते हैं। और जिन लोगों को डायबिटीज है उनको तो यह बिल्कुल अवॉइड करना चाहिए। फाइबर और प्रोटीन का कंटेंट 100 ग्राम साबूदाने के अंदर 1 ग्राम से भी कम होता है। तो फिर इसमें होता क्या है? आए यह समझते हैं। साबूदाने के अंदर सबसे ज्यादा अमाउंट में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। जिनको हम नॉर्मली कार्ब्स भी कहते हैं जो हमारी बॉडी में जाके सिर्फ और सिर्फ [संगीत] चीनी की तरह काम करते हैं। इसमें कुछ अमाउंट में आयरन भी प्रेजेंट होता है। लेकिन जहां इसके अंदर इतने सारे कार्बोहाइड्रेट हैं, तो आयरन की क्वांटिटी इतनी कम आयरन की क्वांटिटी हमारी बॉडी में जाके कोई फायदा नहीं पहुंचाती है। बच्चे जो कि पतले दुबले होते हैं उनको वेट बढ़ाने में यह बहुत मदद कर सकता है। और क्योंकि इसके अंदर कार्ब्स बहुत ज्यादा होते हैं तो यह जिनको कब्ज की परेशानी होती है या पेट से रिलेटेड कुछ भी परेशानी है तो यह हजम बहुत जल्दी होता है और उनका हाजमा अच्छा कर सकता है। लेकिन इसे रोज-रोज़ खाना और ज्यादा अमाउंट में खाना बिल्कुल गलत है। रोज अपने बच्चे की डाइट में शामिल करना यह सोच के कि यह एक हेल्दी फूड है। यह गलत है। अगर आप अपने बच्चे की डाइट में या अपनी डाइट में इसको शामिल करना चाहते हैं तो बहुत ही स्मार्टली इसको प्रोटीन के साथ या फिर किसी भी वेजिटेबल्स के साथ या फाइबर रिच फूड के साथ पेअर अप करके खा सकते हैं ताकि इसकी न्यूट्रिटिव वैल्यू और भी ज्यादा बढ़ सके और जितने भी फ्राइड स्नैक्स साबूदाने के बने हुए होते हैं जैसे पकोड़े या पापड़ इन सबको जितना हद तक हो सके अवॉइड करना चाहिए।


