आज हम बात करने वाले हैं मछली के तेल के बारे में मतलब फिश ऑयल के बारे में और जानेंगे कि किन-किन लोगों को इसको अवॉइड करनी चाहिए। क्या नुकसान हैं, क्या फायदे हैं और किन-किन बीमारियों में इसको लेना जरूरी होता है।
फिश ऑयल मेजरली फैटी फिश के लिवर और टिश्यू से बनाया जाता है। उसको अच्छे से प्रोसेस करके उसका ऑयल एक्सट्रैक्ट किया जाता है और यह मार्केट में लिक्विड फॉर्म में भी अवेलेबल है और कैप्सूल्स के फॉर्म में भी मिलता है।
फिश ऑयल आपके बच्चों की आंखों के लिए और दिमाग के लिए बहुत ही अच्छा होता है। क्योंकि इसके अंदर ओमेगा थ्री फैट्स हैं। ओमेगा थ्री फैट्स एक अच्छे फैट्स माने जाते हैं जो कि दिमाग की डेवलपमेंट के लिए बेस्ट होते हैं। मेंटल डिसऑर्डर्स तक में यह काम करते हैं। मेमोरी की पावर बढ़ाने में और याददाश्त और अच्छी करने में यह बहुत ही बेहतरीन साबित होते हैं। इसके साथ-साथ ओमेगा थ्री आपके बच्चों की आंखों की रोशनी को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा बच्चे स्क्रीन टाइम जब ज्यादा लेते हैं तो उनकी आंखों के मसल कमजोर हो जाते हैं। उनके मसल्स को जो बारीक-बारीक वेंस होती हैं उनको स्ट्रांग करते हैं। जो ड्रनेस हो जाती है आइज में उसको क्योर करते हैं। बच्चों की डाइट के अंदर ओमेगा थ्री होना बहुत ज्यादा जरूरी है। मैं आपको एडवाइस करूंगी कि मार्केट में जो भी सप्लीमेंट्स मिलते हैं उनको ना लेके आप डाइटरी ओमेगा थ्री पे कंसंट्रेट करें। अगर आपके बच्चा नॉन वेजिटेरियन खाता है तो उसको हफ्ते में दो बार फैटी फिश जैसे कि सारडींस, मैक्रिल, एचुबीस इन सबको जरूर शामिल करें। इसके साथ-साथ वेजिटेरियन सोर्सेज में वालनट्स और फ्लेक्स सीड्स ओमेगा थ्री का बहुत अच्छा सोर्स होता है। बच्चों के अलावा बड़ों के लिए भी यह बहुत ही अच्छा है। आंखों के लिए और दिमाग के लिए तो अच्छा है ही। इसके साथ-साथ अगर किसी को कोलेस्ट्रॉल की शिकायत है, ट्राई ग्लिसराइड्स के लेवल्स बढ़े हुए हैं या फिर बीपी हाई रहता है, दिल की कोई परेशानी है, टाइप टू डायबिटीज है, इन सभी बीमारियों में भी बहुत अच्छा साबित हो सकता है। इसके अलावा नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर के लिए तो यह बहुत ही बेहतरीन है। इसके अलावा अल्जाइमर्स डिजीज जैसी खतरनाक बीमारियों के लिए भी फिश ऑयल बहुत ही बेहतरीन होता है।
इसको सही तरीके से और सही डोज़ अपने डॉक्टर से पता करके आप इसके तमाम बेनिफिट्स का फायदा उठा सकते हैं। बस एक चीज का ध्यान रखना है कि अगर आप कोई ऐसी दवाई ले रहे हैं जो कि खून को पतला करती है जैसे हाई ब्लड प्रेशर की दवा तो फिश ऑयल को अवॉइड करना बेहतर है। किसी किसी को फिश ऑयल लेने के बाद फिश डकारें आना और नजिया जैसी फीलिंग आती है। लेकिन ऐसा किसी किसी के साथ होता है। हर किसी के साथ नहीं होता। अगर किसी के साथ ऐसा हो रहा है तो बेस्ट है कि वो ओमेगा थ्री के कैप्सूल्स या ऑयल जो भी ले रहे हैं वो अपने खाने के साथ लें। खाने के मिड में भी ले सकते हैं और खाने के बाद भी ले सकते हैं। ऐसा करने से नजिया और डकारो जैसी शिकायत नहीं होती है। याद रखिए कि कोई भी सप्लीमेंट डाइट का रिप्लेसमेंट नहीं हो सकता। फर्स्ट प्रायोरिटी डाइट ही होनी चाहिए। लेकिन फिर भी अगर आप डाइट से ओमेगा थ्री अच्छी क्वांटिटी में या जो डेली रिक्वायरमेंट है वह नहीं ले पा रहे हैं तो अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके हेल्दी लाइफ के लिए ओमेगा थ्री या फिश ऑयल को अपने रूटीन में इंक्लूड कर सकते हैं। आपको यह बात जान के बहुत हैरानी होगी कि फिश ऑयल ना तो इंटरनली आपको हील करता है बल्कि एक्सटर्नली भी बहुत ही कमाल का साबित हो सकता है। जैसे किसी को भी स्किन से रिलेटेड कोई भी परेशानी है। बॉडी पर रैशेस हो रहे हैं। लाल धब्बे हैं, खुजली होती है या सोरायसिस जैसी परेशानी है, उसके ऊपर फिश ऑयल बहुत ही अच्छा साबित हो सकता है। इसके साथ-साथ अगर बालों की जड़ों में फिश ऑयल लगाया जाए तो बहुत ही अच्छा साबित हो सकता है।


