बच्चे और बूढ़े आखिर इस मौसम में क्यों पड़ते है बीमार


मानसून को बीमारियों का सीजन कहा जाता है। तरह-तरह की बीमारियां छोटे बच्चे हर तीसरे दिन बुखार हो जाता है। लूज मोशन लग जाते हैं। पेट खराब तो बड़ी आम सी दिक्कत है मसून में।  ऐसा है क्यों?

 देखिए मानसून में काफी सारे ऐसे जब ये सीजन आता है तो ये बहुत सारे बैक्टीरिया और वायरसेस को भी अपने साथ लेके आता है। क्योंकि जगह-जगह हम देखते हैं स्पेशली हमारी कंट्री इंडिया में हम काफी सारे गंदगी और सब जगह बारिश की वजह से काफी सारी गंदगी रहती है। जिसकी वजह से वायरसेस और बैक्टीरिया लोगों के थ्रू हमारे घर में एंटर करते हैं। स्पेशली जब छोटे बच्चे होते हैं वो बाहर जाते हैं खेलने स्कूल जाते हैं। स्कूल में बच्चों को बच्चों के थ्रू काफी सारी बीमारियां इनफेक्शंस हो जाते हैं जिसकी वजह से वह घर में हमारे इनफेक्शन आता है और यह वायरस या बैक्टीरियाज ऐसे होते हैं जो स्प्रेड बहुत जल्दी होते हैं एक से किसी और दूसरे को स्पेशली उन बच्चों को उन बुजुर्गों को जिनके अंदर इम्यूनिटी की कमी बहुत ज्यादा है जिनके अंदर पहले से ही कोई बीमारी है उनको यह बहुत जल्दी उनके अंदर स्प्रेड हो जाती तो जैसे आप बता रहे हो कि इस मौसम में बहुत ज्यादा बीमारियां होती हैं। बीमारियों का सीजन भी कहा जाता है इसे। तो आप तो डाइट का बताओगे सबसे पहले क्योंकि आप दवाइयां तो बताते नहीं हो। तो अगर हम इस दौरान की डाइट कैसी रखें? क्या रखें डाइट? इसमें डाइट हमें बहुत अच्छी और न्यूट्रिशियस और बैलेंस्ड रखने की जरूरत है। तीनचार चीजें हैं जिसका अगर हम ध्यान रखेंगे तो हम बीमारियों से बचें। जैसे कि हम सब्जियों का सेवन बहुत ज्यादा करें। जो मौसम के फल हैं उनको खाएं। हमारे किचन में से बहुत ऐसी चीजें हैं जिनमें काफी सारी मेडिसिन के बेनिफिट्स होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। जैसे कि टर्मरिक हो गया, जिंजर हो गई, ब्लैक पेपर हो गई। इन सबका बहुत ज्यादा खाने में उपयोग करें। जिसकी वजह से आपको ये सब बीमारियां बहुत कम हो सकती हैं।  

 लेकिन मौसमी फलों में भी क्या खाएं? क्योंकि आजकल केले भी मिल जाते हैं, आपको प्लम्स भी मिल जाएंगी, मैंगोज़ भी मिल जाएंगे, अनार भी मिल जाएंगे, एप्पल भी मिल जाएंगे। और आजकल तो पता ही नहीं चलता क्योंकि आजकल दुकानों पे सब मिल जाएगा कोल्ड स्टोरेज में। तो सबसे ज्यादा क्या खाएं फलों में और सबसे ज्यादा क्या कौन सा फल अवॉइड करें? 

फलों की अगर मैं बात करूं तो मैं सबसे यही कहती हूं कि जो सबसे ईजीली आपको अवेलेबल है वो फल खाना चाहिए। कोई भी ऐसा फल जो आपको मुश्किल से मिल रहा है जैसे आपने कहा कि कोल्ड स्टोरेज में स्टोर होते हैं फ्रूट्स वो बिल्कुल नहीं लेने चाहिए। जो आपके सीजनल फ्रूट्स हैं जो आपको लोकल मार्केट में मिल रहे हैं ईली मिल रहे हैं वो आप लें और उससे आपको सबसे ज्यादा बेनिफिट्स होंगे। प्लस अगर आपको खांसी हो रही है, जुकाम हो रहा है, तो कुछ फ्रूट्स हैं जैसे केला है, वह अवॉइड करना चाहिए और खट्टी चीजें हैं, सिट्रस फ्रूट्स जो होते हैं वो अवॉइड करनी चाहिए और अगर आप बिल्कुल ठीक हैं, तबीयत आपकी ठीक है तो आप ये सब कुछ आराम से ले सकते हैं जो भी आपको अवेलेबल है। और इसमें सिट्रस फूड्स जरूर जरूर खाने चाहिए। जिनको खांसी है उनको थोड़ा अवॉयड करना चाहिए और जो बिल्कुल परफेक्ट हैं ठीक हैं उनको सिट्रस फ्रूट्स लेने चाहिए क्योंकि उसमें विटामिन सी बहुत ज्यादा होता है और विटामिन सी इनफेक्शन से लड़ने के लिए बहुत ज्यादा बेनिफिशियल होता है। उसमें बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिसकी वजह से हमारे अंदर बैक्टीरिया और वायरस की एंट्री काफी कम हो सकती है। मैम आप फ्रूट्स का बता रहे हो। अब मुझे जूस का याद आ रहा है। क्या जूस भी पी सकते हैं? क्या जूस पीना भी उतना ही हेल्दी है जितना फ्रूट्स को खाना हेल्दी है? जूस ये बहुत ही एक कंट्रोवर्शियल सा टॉपिक है क्योंकि बचपन से हम सुनते आ रहे हैं और हमारे मम्मी पापा दादा-दादी बोलते हैं कि भाई जूस पिलाओ बच्चों को जरूर जूस पिलाओ। बच्चों को बड़ों को जैसा भी पैक चीज से तो हम जितना दूर रह उतना बेहतर है। मैं इस वक्त फ्रेश फ्रूट जूस की बात कर रही हूं। तो हमें फ्रूट जूस से ज्यादा फ्रूट लेना चाहिए। होल फ्रूट खाना चाहिए। फ्रूट के जूस से बचना चाहिए। क्योंकि फ्रूट के जूस में सिर्फ और सिर्फ चीनी होती है। हम उसमें उसके काफी सारे बेनिफिट्स जितने भी सब कुछ निकल जाता है और सिर्फ चीनी बचती है। तो चीनी आप यकीन नहीं करेंगे एक मजे की बात बताती हूं आपको कि एक कोक का जो कैन आता है जी जी। उसमें 24 ग्राम चीनी होती है। हम्म। और फ्रूट का जो जूस होता है उसमें भी 24 ग्राम चीनी होती है। हम तो आप समझे कि कोक और फ्रूट जूस एक सा हो गया। बस उसमें फ्रूट जूस में थोड़े बहुत विटामिंस आपको मिलेंगे। लेकिन जब इतना नुकसान हो रहा है। आप वो फ्रूट बता रहे हो जो कि ताजाताज़ा निकला है। पैक्ड नहीं। पैक्ड नहीं। तो इतना नुकसान उसमें इतनी जब चीनी है तो थोड़े बहुत अगर उसमें विटामिंस हैं तो उसका कुछ फायदा नहीं होता हमारी। ये बात एक डाइटिशियन ही बता सकती है हमें। तो आप जभी भी खाएं तो एक होल फ्रूट खाएं। हम हम जब जूस निकालते हैं जैसे आपने ऑरेंज का जूस निकाला तो एक ग्लास जूस निकालने के लिए चार से पांच ऑरेंजेस लगते हैं। तो कितनी चीनी हो गई आप सोचें? और जब आप पूरा ऑरेंज खाने बैठेंगे तो एक से ज्यादा नहीं खा पाएंगे। एक या एक से आधा और खा लेंगे जी। तो उसमें बहुत फर्क आ जाता है। फाइबर हमें मिलता है। चीनी तो फ्रूट में भी है लेकिन उसके साथ फाइबर मिलता है। 

You May Also Like

Loading...
Post a Comment (0)
Previous Post Next Post