Sunscreen ही ना बिगाड़ दे चेहरा ,ऐसे चुनें अपनी skin के लिए perfect cream?


गर्मियां आ गई है तो सूरज से बचने के लिए एसपीएफ लगाओ। आज तक हम बस इतना ही जानते हैं। लेकिन यह एसपीएफ हमारी स्किन के लिए क्यों जरूरी है? इसको लगाने का सही प्रोसेस क्या है? और कहीं आप अपनी स्किन के हिसाब से गलत एसपीएफ तो नहीं लगा रहे। यह एसपीएफ 15 30 क्या होता है? इसमें कितना फर्क है और क्या सही है? 

असल में एसपीएफ या सनस्क्रीन सिर्फ एक क्रीम नहीं बल्कि आपकी त्वचा को रोज होने वाले नुकसान से  बचाने का सबसे आसान और जरूरी तरीका है। जब हम धूप में निकलते हैं तो सूरज की किरणें हमारी स्किन पर सीधे असर डालने लगती हैं। इन किरणों में यूवीबी रेज त्वचा को जलाती हैं और यूवीए रेज अंदर जाकर के धीरे-धीरे स्किन को और कमजोर करती हैं। जिससे झुर्रियां, दाग, धब्बे, ब्लेमिशेस, ढीलापन आने लगता है और यह क्रीम आपको उन यूवीए रेज से बचाती है। इतना ही नहीं यह रेस सिर्फ सूरज से ही नहीं बल्कि गैस, माइक्रोवेव, रेफ्रिजरेटर और आपके मोबाइल फोन से तक निकलती है जो स्किन को खराब करती है। और यह सिर्फ फीमेल में नहीं बल्कि मेल स्किन को भी उतना ही डैमेज करती है। इसलिए सनस्क्रीन लगाना सिर्फ दिखाने के लिए नहीं है बल्कि स्किन को अंदर से सुरक्षित रखने के लिए भी बहुत जरूरी होता है। एसपीएफ का वैसे मतलब होता है सन प्रोटेक्शन फैक्टर एक तरह का माप है जो बताता है कि सनस्क्रीन आपकी त्वचा को यूवी रेज से कितना बचा सकती है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आपकी स्किन बिना कुछ लगाए 10 मिनट में जलने लगती है तो आपको एसपीएफ 30 लगाने पर वो लगभग 30 गुना ज्यादा समय तक सुरक्षित रख सकती है। हालांकि यह सिर्फ समझाने के लिए है। असल में असर इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सनस्क्रीन सही मात्रा में लगाया है या नहीं और कितनी बार में आप यह दोबारा लगा रहे हैं। इसके लिए आपको पहले एसपीएफ 15, 30 और 50 का डिफरेंस समझना होगा। जब हम एसपीएफ के साथ इन नंबरों की बात करते हैं तो लोग अक्सर सोचते हैं कि एसपीएफ 50 एसपीएफ 30 से ज्यादा स्ट्रांग होगा। लेकिन असल में कहानी थोड़ी सी अलग है।

 एसपीएफ का नंबर सीधा-सीधा प्रोटेक्शन का मल्टीप्लायर नहीं है। बल्कि ये बताता है कि आपकी स्किन तक यूवीबी रेज कितनी कम पहुंचेंगी। अगर हम बात करें इसे आसान तरीके से समझे तो एसएफ 15 आपकी स्किन तक आने वाली लगभग 7% यूवीबी रेज को अंदर जाने देता है। एसपीएफ 30 इसे घटा के करीब 3% कर देता है और एसएफ 50 इसे लगभग 2% तक ले आता [संगीत] है। अब देखने में यह 7% 3% और 2% का फर्क छोटा सा लगता है। लेकिन असली खेल यहीं पर है। मान लो आप रोज धूप में जाते हो तो एसपीएफ 15 के साथ आपकी स्किन हर दिन थोड़ा-थोड़ा डैमेज ले रही  है। जबकि एसपीएफ 30 और 50 उस डैमेज को काफी हद तक कम कर देते हैं। यही वजह है कि एसपीएफ 15 और एसपीएफ 30 के बीच का फर्क एक्चुअली काफी बड़ा माना जाता है। क्योंकि यह एक्सपोज़र को लगभग आधा कर देता है। वहीं SPF 30 और SPएफ 50 के बीच का फर्क छोटा जरूर है, लेकिन अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं या आउटडोर काम करते हैं या आपकी स्किन सेंसिटिव है तो यह एक्स्ट्रा 1% प्रोटेक्शन भी धीरे-धीरे बहुत बड़ा डिफेंस बना देता है। एक और जरूरी बात जो लोग मिस कर देते हैं वो है कि एसपीएफ सिर्फ कितना प्रोटेक्ट करता है ये नहीं बताता बल्कि ये भी इनडायरेक्टली बताता है कि सनस्क्रीन की गलती जैसे कम लगाना या देर से री-अप्लाई करने को भी कितना हैंडल कर पाएगा क्योंकि रियल लाइफ में हम कभी भी परफेक्ट मात्रा में सनस्क्रीन नहीं लगाते इसलिए हायर एसपीएफ जैसे कि 50 एक तरह का सेफ्टी मार्जिन भी माना जाता है। इसी वजह से कई स्किन एक्सपर्ट्स [संगीत] एसएफ 50 लगाने की सलाह देते हैं। हालांकि रोज कम से कम एसपीएफ 30 इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ज्यादा धूप में रहने वाले लोगों को ही एसपीएफ 50 लगाने की सलाह है क्योंकि एसपीएफ 50 बेसिक प्रोटेक्शन है। अगर आप घर में हैं तो भी आप इसे अप्लाई कर लीजिए। अब आप कितनी देर कितने समय तक बाहर रहते हैं उस हिसाब से आप क्रीम चूज़ कर सकते हैं और अपना एसपीएफ का नंबर भी [संगीत] चूज़ कर सकते हैं। वहीं सिर्फ सनस्क्रीन होना ही काफी नहीं है। उसे सही तरीके से लगाना भी असली प्रोटेक्शन देता है। सबसे जरूरी बात यह है कि सनस्क्रीन की क्वांटिटी सही हो। चेहरे और गर्दन के लिए लगभग दो उंगलियां जितनी मात्रा लगाना जरूरी होता है। क्योंकि कम लगाने पर स्किन पूरी तरह से कवर नहीं होती है। यूवी रेज फिर भी आपके अंदर पहुंचती रहती है। दूसरी अहम चीज है टाइमिंग। सनस्क्रीन को हमेशा बाहर निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले और अगर आप कर सकते हैं तो कम से कम 30 मिनट पहले लगाना चाहिए ताकि यह स्किन पर सही से सेट हो के प्रोटेक्शन लेयर बन सके और यह आपको प्रोटेक्ट भी कर सके। अगर आप बाहर ज्यादा समय तक रहते हैं या आपको पसीना आता है या आपका पानी में संपर्क होता है तो हर दो से 3 घंटे में इसे दोबारा लगाना भी जरूरी है। साथ ही सिर्फ चेहरा ही नहीं बल्कि गर्दन, कान और हाथ जैसी खुली जगहों पर भी सनस्क्रीन लगाना चाहिए क्योंकि वहीं सबसे ज्यादा स्किन डैमेज होती है। जब आप रोज सनस्क्रीन इस्तेमाल करते हैं तो यह आपकी स्किन को कई तरह से फायदा देता है। यह त्वचा की ऊपर की परत को सुरक्षित रखता है। अंदर के कोलेजन को टूटने से बचाता है और स्किन को लंबे समय तक टाइट और स्मूथ बनाए रखता है। और इसके अलावा यह टैनिंग, पिगमेंटेशन और अनइवन स्किन टोन को कम करता है। कहीं-क केसेस में यह भी देखा गया है कि किसी का स्किन टोन पूरी तरह से बदल के रख देता है। जिससे स्किन साफ और हेल्दी दिखाई देती है। लंबे समय तक नियमित उपयोग से सन डैमेज का असर बहुत कम हो जाता है और स्किन ज्यादा समय तक जवान बनी रहती है। बहुत लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ तेज धूप में या बाहर जाने पर ही जरूरी है। लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है। जैसा कि हमने आपको बताया कि सूरज की यूवी रेज बादलों और खिड़की के कांच से भी अंदर आ सकती है। इसलिए अगर आप घर के अंदर भी हैं फिर भी दिन के समय सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद रहेगा। खास करके अगर आप खिड़की के पास बैठते हैं या लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं। आखिर में समझने वाली बात और सबसे जरूरी बात यह है कि सनस्क्रीन कोई एक्स्ट्रा स्टेप नहीं है। बल्कि डेली रूटीन का जरूरी हिस्सा है। जैसे आप फेस वॉश या मॉइस्चराइजर लगाते हैं, वैसे ही एसपीएफ को [संगीत] भी रोज लगाना चाहिए। सही एसपीएफ, सही मात्रा और सही समय पर इस्तेमाल करने से आपकी स्किन लंबे समय तक सुरक्षित, साफ और हेल्दी बनी रह सकती है। 

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